मोहब्बत या दोस्ती

इज़हार जो किया था तुझसे मोहब्बत का,
तेरी ना सुन कर मेरी आँखे भर आई थी।
मेहरूम तो रह गई मैं मोहब्बत से ,
लेकिन तेरी रुस्वाई ने ही मेरी कलम से दोस्ती कराई थी।

उफ्फ तेरा गुस्सा

मत किया कर यूँ लड़ाई मुझसे,
तु गुस्से में भी लाजवाब लगती है।
दिल करता होगा तेरा मुझे छोड़ जाने का,
पर मेरी गले लगाने की आरज़ू होती है।

मन्नत

जरुरी तो नहीं तेरी हर मन्नत पूरी हो , हर इबादत उस तक पहुँचे ,
ऐ दोस्त ज़िन्दगी अधूरी ख्वाइशों और टूटी शर्तो पर भी बेसाख्ता चला करती हैं।

मुझे नफरत है माँ तुझसे

मुझे नफरत हैं माँ तुझसे, तू झूठ बोलती हैं
रात के खाने में पानी पीकर भूखी सोती हैं।

मुझे नफरत हैं माँ तुझसे, तू झूठ बोलती हैं
अपनी परेशानियाँ छुपा कर अकेली रोती हैं।

मुझे नफरत हैं माँ तुझसे, तू झूठ बोलती हैं
सारे घर की ज़िम्मेदारियाँ तू अकेली ढ़ोती हैं।

मुझे नफरत हैं माँ तुझसे, तू झूठ बोलती हैं
कितने गम समेट के खुद में हँस के बोलती हैं।

मुझे नफरत हैं माँ तुझसे, तू झूठ बोलती हैं
हमारे बचपन को सँवारने में अपनी जवानी खोती हैं।

मुझे नफरत हैं माँ तुझसे, तू झूठ बोलती हैं
अपने शौक़ से बढ़कर हमारी खुशियों को तोलती हैं।

मुझे नफरत हैं माँ तुझसे, तू झूठ बोलती हैं
हमारी मुस्कुराहटो में अपनी ज़िन्दगी बटोरती हैं।

क्या तुझे याद हैं माँ आखरी बार तू खुद के लिए कब जी थी ?
याद करना माँ तू कब झूठ नहीं बोलती थी ?
याद करना माँ तू कब झूठ नहीं बोलती थी ?

सादगी

दुनियादारी की समझ रखने वाले हम बड़ी अकड से चलते थे,
तेरी सादगी ने मुझे सजदा सीखा दिया !!

I always  thought myself to be superior as i knew worldiness,

but after knowing about your simplicity I learnt to bow before almighty.

Toota Dil

किसी ने हमसे पूछा शौक़ ए शायरी कहाँ क़ाफूर हैं जनाब ,
हमने कहा – इज़हार ए मोहब्बत के इनकार के बाद,
शौक़ हवा और हम पानी !!

Somebody asked me- why have you stopped writing poems ? I answered- after being rejected by love of my life, all my hobbies are air(that means disappeared) and I am like water, which gets the shape of whichever vessel you put in.